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अच्छी नींद के साथ सेहतमंद रहने के लिए चंद्र नमस्कार का करें अभ्यास, इसमें इतने हैं आसन

By Dabangdunia News Service | Publish Date: Jun 21 2024 5:38PM | Updated Date: Jun 21 2024 5:38PM
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21 जून को हर साल अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को लोग एक फेस्टिवल की तरह सेलिब्रेट करते हैं। योग न सिर्फ तन की बल्कि मन की शक्ति को भी बढ़ाता है, इसलिए योग की हर एक तकनीक इंसान को स्वस्थ और खुशहाल जीवन की ओर लेकर जाती है। भारत में हजारों साल पहले शुरू हुआ योग आज दुनियाभर में एक अवधारणा बन चुका है। वैसे तो योग में कई तरह के आसन होते हैं और इसके अलग-अलग फायदे होते हैं, लेकिन सूर्य नमस्कार एक योग की श्रृंखला है, जिसमें 12 आसन एक साथ किए जाते हैं। फिलहाल आज हम सूर्य नमस्कार नहीं बल्कि चंद्र नमस्कार की बारे में जानेंगे।

सूर्य नमस्कार के बारे में तो ज्यादातर लोग जानते होंगे या फिर इसके बारे में सुना होगा, लेकिन चंद्र नमस्कार के बारे में कम ही लोगों को पता होता है। जिस तरह से सूर्य नमस्कार के कई फायदे होते हैं, ठीक उसी तरह से चंद्र नमस्कार भी आपके बाहरी और अंदरूनी अंगों व मानसिक स्वास्थ्य को फायदा पहुंचाता है। भले ही दोनों में 12-12 योगासन हो, लेकिन उन्हें करने का तरीका बिल्कुल अलग होता है। तो चलिए एक्सपर्ट से जान लेते हैं कि सूर्य नमस्कार के कितना अलग होता है चंद्र नमस्कार और इसके कितने फायदे मिलते हैं।

आयुर्वेद एक्सपर्ट किरन गुप्ता कहती हैं कि जहां सूर्य नमस्कार एनर्जेटिक होता है, तो वहीं चंद्र नमस्कार बॉडी को शांत और ठंडा रखने में मदद करता है और सूदिंग इफेक्ट (रिलैक्स महसूस कराना) देता है। इसमें भी सूर्य नमस्कार की तरह 12 पोज किए जाते हैं, लेकिन चंद्र नमस्कार करते वक्त बॉडी की फॉरवर्ड बेंडिंग (सामने से मोड़ना) नहीं की जाती है, बल्कि इसमें आसन करते वक्त शरीर को साइड से बेंड किया जाता है।

एक्सपर्ट किरन गुप्ता के मुताबिक, चंद्र नमस्कार को भी स्टैंडिंग पोज, नमस्कार मुद्रा से शुरू किया जाता है। फिर इसमें माउंटेन मुद्रा की जाती है, जिसमें हाथों को कंधों की सीध में ऊपर करके तान दिया जाता जाता है, लेकिन पैरों को जमीन से नहीं उठाना होता है। इसके बाद त्रिकोणासन किया जाता है। चंद्र नमस्कार में बायीं तरफ से शुरू करके 12 स्टेप किए जाते हैं और फिर दायीं तरफ 12 स्टेप किए जाते हैं, हालांकि इसे बायीं ओर से शुरू करके बायीं ओर ही छोड़ा जाता है, क्योंकि ये चंद्र नमस्कार होता है। त्रिकोणासन के बाद स्कॉट पोज होता है और फिर इसी तरह से सूर्य नमस्कार की तरह क्रम में मलासन, पश्चिमोत्तासन आदि करते हुए सभी आसन पूरे किए जाते हैं।

एक्सपर्ट किरन गुप्ता बात करते हुए बताती हैं कि चंद्र नमस्कार करने से शरीर को ठंडा और शांत रखने में तो मदद मिलती ही है, इसके अलावा बॉडी की फ्लेक्सिबिलिटी भी बढ़ती है और इससे पाचन में सुधार होता है, जिससे कब्ज, गैस जैसी समस्याओं से बचाव होता है। वहीं चंद्र नमस्कार कमर दर्द वालों के लिए भी फायदेमंद है, जबकि कमर दर्द के किसी भी रोग से पीड़ित व्यक्ति को सूर्य नमस्कार न करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि उसमें आसन करते वक्त शरीर को सामने की ओर मोड़ना पड़ता है। चंद्र नमस्कार करना हाई बीपी की समस्या वालों के लिए भी बेहद फायदेमंद रहता है।

आयुर्वेदा एक्सपर्ट किरन गुप्ता कहती हैं कि कई लोग चंद्र नमस्कार की मुद्राओं को एक तरह से स्ट्रेचिंग मानते हैं, लेकिन यह इतना भी आसान नहीं होता है। जिस तरह से अन्य योगासन करते वक्त शरीर पर ज्यादा प्रेशर नहीं डालना चाहिए ठीक उसी तरह से चंद्र नमस्कार करते वक्त भी शरीर को ज्यादा मोड़ने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। इसे आराम से करें, जिससे शरीर को काफी रिलैक्स और फायदा मिलता है।

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