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कोरोना के बाद कभी 'नॉर्मल' नहीं हो सकेगी जिंदगी : अमेरिकी वैज्ञानिक

By Dabangdunia News Service | Publish Date: Apr 9 2020 12:10AM | Updated Date: Apr 9 2020 12:11AM
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नई दिल्‍ली। कोविड-19 (Covid-19) के संक्रमण का आंकड़ा लगभग साढ़े 14 लाख हो चुका है। मौत की दर भी लगातार बढ़ते हुए 83 हजार से ज्यादा हो गई है। अमेरिका में इसका आउटब्रेक सबसे ज्यादा है, जहां 400,549 कोरोना मरीजों में से तकरीबन 13 हजार जानें जानें चली गई हैं। 7 अप्रैल को ये दर बढ़कर 1,800 से ज्यादा हो गई, 24 घंटों के भीतर इतनी मौतें अबतक की सबसे ज्यादा मौतें हैं।
 
वाइट हाउस के शीर्ष अधिकारियों का मानना है कि मौत का आंकड़ा अभी और बढ़ने वाला है और आने वाले हफ्तों में ये ढाई लाख भी हो सकता है। टीके और इलाज की खोज में जुटे वैज्ञानिकों के मुखिया Dr Fauci ने इस बीच कहा कि ये सब हो भी जाए तो भी अब सबकुछ पहले जैसा नहीं रहेगा। Dr Fauci देश के शीर्ष संक्रामक रोग विशेषज्ञ हैं और National Institute of Allergy and Infectious Diseases (NIH) के डायरेक्टर हैं। प्रेस ब्रीफ के दौरान उनसे पूछा गया कि क्या बिना किसी वैक्सीन या इलाज के हालात सामान्य हो सकते हैं? तब उन्होंने ये कहा था। 
 
असल में कोरोना वायरस संक्रमण के कारण दुनिया भर में कारोबार और सामाजिक जीवन बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। इसी वजह से पिछले सप्ताह वाइट हाउस में रेगुलर प्रेस ब्रीफिंग के दौरान जमा हुए वैज्ञानिकों के प्रमुख Dr Fauci ने कहा कि चीन के वुहान से जो वायरस फैला था, उसके बाद अब हम एक सोसायटी की तरह काम भले ही करने लगें, लेकिन वापस नॉर्मल नहीं हो सकेंगे। हालांकि वैक्सीन आने के बाद काफी राहत मिलेगी लेकिन तब भी हालात सामान्य नहीं होंगे। वैक्सीन को 'show stopper' मानते हुए Dr Fauci ने अनुमान लगाया कि पूरी तेजी से साथ भी काम हो तो इसे आने में कम से कम 1 साल लगेगा।
 
इस दौरान कोविड-19 को नियंत्रण करने के लिए किसी कारगर दवा का आना जरूरी है। इस बीच यूएस में एंटीबॉडी टेस्ट पर भी काम चल रहा है ताकि ये पता चल सके कि कितने लोग इस वायरस से संक्रमित हुए हैं और क्या अब उनका शरीर इसके दोबारा हमले को सह सकेगा? बता दें कि अमेरिका में वायरस का कम्युनिटी ट्रांसमिशन शुरू हो चुका है, इसके बाद रोग प्रतिरक्षा पैदा होने लगती है। हालांकि वैज्ञानिक ये डर भी जता रहे है कि कोरोना वायरस सीजनल बीमारी का रूप ले ले और हर साल कोहराम मचाए।
 
इन सबके साथ ही माना जा रहा है कि वैक्सीन आने और दुनियाभर में उसके पहुंचने के बाद भी वैश्विक स्तर पर कई बातें बदलेंगी। जैसे वर्क फ्रॉम होम की संस्कृति बढ़ेगी। कोरोना का संक्रमण फैलने से रोकने के लिए फिलहाल बड़ी संख्या में लोग घरों से काम कर रहे हैं। एक बार अगर इससे काम प्रभावित होता न दिखे, तो ये व्यवस्था चल जाएगी। न्यूयॉर्क में Bain's Macro Trends Group के डायरेक्टर Karen Harris के अनुसार दुनियाभर में दफ्तर अपने इंफ्रा पर कम से कम खर्च लगाएंगे और लोगों को घरों से काम करने को बढ़ावा देने लगेंगे।
 
इसके बाद पब्लिक हेल्थ की सेवा बेहतर होगी और रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा। Australia National University के Warwick McKibbin के अनुसार लगभग सभी देशों को अभी बीमारी फैलने से रोकने के लिए बेतहाशा खर्च करना पड़ेगा, जिसके बाद वायरोलॉजी और एपिडेमियोलॉजी में शोधों को बढ़ावा मिलेगा ताकि भविष्य में ऐसा न हो। साउथ कोरिया जैसे देश इसके प्रमाण हैं, जिन्होंने सार्स के बाद कई चीजों को रुटीन में शामिल कर लिया, जैसे वहां रेस्त्रां या किसी प्रदर्शनी या किसी भी भीड़ वाली जगह जाने पर सबका तापमान जांचा जाता है।
 
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