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CM अमरिंदर: किसानों की आय में सुधार तथा पर्यावरण संतुलन को बनाये रखना जरूरी

By Dabangdunia News Service | Publish Date: Jun 12 2021 4:32PM | Updated Date: Jun 12 2021 4:32PM
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चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कामयाब किसान, खुशहाल पंजाब मिशन के तहत किसानों की आय में सुधार लाने और भविष्य के लिए वातावरण संतुलन को कायम रखने की जरूरत पर बल दिया है। ज्ञातव्य है कि  प्रदेश सरकार ने तीन सालों के लिए 3780 करोड़ की लागत के साथ ‘कामयाब किसान, खुशहाल पंजाब’ मिशन की शुरुआत की है। कृषि, बागबानी और भूमि और जल संरक्षण विभागों के कामकाज का वर्चुअल तौर पर कल जायजा लेते हुए कैप्टन सिंह ने कृषि क्षेत्र में विभिन्न सरकारी स्कीमों को जोडने की महत्ता पर जोर दिया जिससे किसानों को पूरा फायदा मिल सके।
 
उन्होंने बागबानी विभाग को मौजूदा सिटरस अस्टेटों को मजबूत करने के लिए कहा जिससे किसानों की आमदन बढ़ाने के लिए किसानों को बड़े स्तर पर फलों का उत्पादन करने के लिए उचित जानकारी मुहैया करवाई जा सके।  किन्नू, अमरूद, लीची जैसी अधिक कीमत वाली बागबानी फसलों के उत्पादन से किसानों को गेहूँ -धान के फसली चक्र की तरफ मोड़ा जा सकेगा। उन्होंने कृषि विभाग और पंजाब कृषि यूनिवर्सिटी को सांझे तौर पर किसानों के लिए प्रसार प्रोग्रामों की शुरुआत करने के लिए कहा जिससे उनको फसली विभिन्नता के हिस्से के तौर पर सब्जियों के उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
 
मुख्यमंत्री ने पंजाब कृषि यूनिवर्सिटी के उप कुलपति को वैज्ञानिकों, कृषि विशेषज्ञों के अलावा प्रगतिशील किसानों के प्रतिनिधिमंडल को कृषि विकास और जल प्रबंधन के माडल का अध्ययन करने के लिए इजराइल भेजने के आदेश दिए क्योंकि वहाँ की जलवायु परिस्थितियों भी पंजाब जैसी ही हैं। कैप्टन सिंह ने धान की सीधी रोपायी की प्रौद्यौगिकी को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग के प्रयासों की सराहना की क्योंकि इस विधि से सिंचाई पानी को बचाने के अलावा मजदूरों की कमी से निपटने में मदद मिलेगी। उन्होंने उम्मीद जाहिर की कि खरीफ सीजन के दौरान सीधी रोपायी के तहत एक लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल लाने का लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरा होगा।
 
मुख्यमंत्री ने कृषि विभाग से आग्रह किया कि वो किसानों को कीटनाशकों के कम इस्तेमाल के प्रति जागरूक करे ।  इस कदम से बासमती की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा जिससे इसके निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने अतिरिक्त मुख्य सचिव को कहा कि बासमती के निर्यात की खेप में कीटनाशकों की मात्रा अधिक पाई गई है,ऐसे में कीटनाशकों पर तुरंत पाबंदी लगाने के लिए भारत सरकार के समक्ष मामला उठाया जाये। इसके अलावा ‘पानी बचाओ, पैसा कमाओ स्कीम ’ का दायरा बढ़ाने की संभावनाएं तलाशने को कहा ताकि तेजी से गिरते भूजल को बचाया जा सके।      बैठक में बताया गया कि यह स्कीम साल 2019 -21 में पायलट प्रोजैक्ट के आधार पर छह फीडरों पर शुरू की गई थी और इस स्कीम के साथ जुड़े 972 किसानों को 8.19 लाख रुपए अदा किये गए। अब स्कीम का विस्तार करके 11 जिलों में 250 फीडरों को इसके तहत लाया गया है।
 
पराली जलाने के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कृषि विभाग के अधिकारियों को कहा कि किसानों को अपने खेतों में ही फसलों के अवशेष के प्रबंधन के लिए प्रेरित करने के लिए सक्रिय भूमिका निभाई जाये जिससे हवा प्रदूषण से वातावरण को बचाया जा सके। किसानों के लिए फसलों के अवशेष के प्रबंधन की मशीनरी की आसान पहुँचायी जाये और उपलब्धता को यकीनी बनाने को कहा जिससे धान की पराली के साथ कारगर ढंग से निपटा जा सके। मुख्यमंत्री ने पराली न जलाने के एवज में किसानों को मुआवजा देने की जरूरत पर दिया और भारत सरकार से अपील की कि पराली न जलाने वाले किसानों को 100 रुपए प्रति क्विंटल अदा करना चाहिए।
 
वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने विभागीय अधिकारियों को कहा कि वे किसानों को निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग के द्वारा सेवाऐं मुहैया करवाने को यकीनी बनाएं जिससे अलग-अलग विकास योजनाओं का लाभ हर किसान को मिले सके। पंजाब राज किसान कमीशन के चेयरमैन अजयवीर जाखड़ ने सुझाव दिया कि धान की सीधी रोपाई शुरू करने और पराली जलाने को रोकने के लिए कार्बन क्रेडिट का लाभ लेने के लिए एक प्रोग्राम बनाया जाना चाहिए जिससे उन किसानों की सहायता की जा सके जिन्होंने पहले ही इन नवीन तकनीकों को अपना लिया है। उन्होंने शुरुआती प्रशिक्षण और मिड-कॅरियर प्रशिक्षण के जरिये कृषि विभाग के स्टाफ के सामर्थ्य निर्माण की जरूरत पर जोर दिया।
 
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