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सुखबीर बादल सर्वसम्मति से अकाली दल के अध्यक्ष चयनित

By Dabangdunia News Service | Publish Date: Dec 15 2019 6:56PM | Updated Date: Dec 15 2019 6:56PM
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अमृतसर। शिरोमणि अकाली दल के 99वें स्थापना दिवस के अवसर पर शनिवार को पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री और?सांसद सुखबीर सिंह बादल को सर्वसम्मति से शिरोमणि अकाली दल (बादल)?का अध्यक्ष चुन लिया गया। बादल तीसरी बार पार्टी के अध्यक्ष चुने गए हैं। तेजा सिंह समुद्री हाल में शिरोमणि अकाली दल के आम सत्र में जत्थेदार तोता सिंह ने अध्यक्ष पद के लिए सुखबीर सिंह बादल के नाम का प्रस्ताव रखा जिसे सर्वसम्मति से मंजूर कर लिया गया। इससे पहले वर्ष 2008 में सुखबीर बादल पहली बार शिअद (बादल) के अध्यक्ष चुने गए थे तब प्रकाश सिंह बादल ने पार्टी के तत्कालीन वरिष्ठ अध्यक्ष व मंत्री रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा से सुखबीर बादल के नाम का प्रस्ताव पेश करवाया था और डींडसा ने उसका समर्थन किया था।
 
वर्ष 2013 में भी अध्यक्ष पद के चुनाव में ब्रह्मपुरा ने सुखबीर बादल का नाम अध्यक्ष पद के लिए पेश किया था और ढींढसा ने उसका अनुमोदन किया था। लगातार दो बार सुखबीर बादल को अध्यक्ष पद का ताज पहनाने वाले उक्त दोनों अकाली नेता अब बादल परिवार के विरोध में हैं। श्री ब्रह्मपुरा ने अब अपना अलग अकाली दल टकसाली बना लिया है। शिअद के इन दोनों वरिष्ठ नेताओं के विरोध के बावजूद अकाली दल का वर्तमान नेतृत्व सुखबीर बादल के समर्थन में है। शिरोमणि अकाली दल द्वारा पार्टी का 99वां स्थापना दिवस आज श्री हरिमंदिर साहिब परिसर में मनाया जा रहा है।
 
?जिसमें शामिल होने के लिए पार्टी प्रधान सुखबीर सिंह बादल, केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल, बिक्रम सिंह मजीठिया के अलावा नेता और पार्टी कार्यकर्ता हरिमंदिर साहिब पहुंचे। पंजाब के पूर्व मंत्री और शिरोमणि अकाली दल के प्रवक्ता दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि सभी सर्वसम्मति से बादल को प्रधान चुना है। उन्होंने कहा कि जो लोग पार्टी छोड़कर गए हैं उन्होंने पार्टी के साथ विश्वासघात किया है। सुखबीर सिंह बादल ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि पार्टी के सभी नेता और कार्यकर्ता एकजुट हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने अकाली दल भाजपा सरकार द्वारा शुरू की गई सभी कल्याणकारी योजनाओं को बंद कर दिया है। उनहोने कहा कि  राज्य का खजाना खाली नहीं है लेकिन यह प्रबंधक पर निर्भर करता है कि कंपनी को कैसे चलाना है। उन्होंने कहा कि शिअद के शासनकाल में राज्य में कभी भी सांप्रदायिक हिंसा नहीं हुई है।  उन्होंने कहा कि पंजाबियों ने देश की स्वतंत्रता के लिए सबसे ज्यादा कुबार्नियां दी हैं। 
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