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बाघिन पी-234 के कुनबे से गुलजार हुआ अकोला बफर

By Dabangdunia News Service | Publish Date: Mar 6 2021 4:51PM | Updated Date: Mar 6 2021 4:51PM
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पन्ना। पर्यटन को बढ़ावा देने तथा स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने की मंशा से प्रदेश सरकार द्वारा शुरू की गई ‘बफर में सफर’ की अनूठी गतिविधि से मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व के अकोला बफर में सुगमता के साथ पर्यटकों को बाघ दर्शन होने से यहां का आकर्षण बढ़ गया है। अकोला बफर में भ्रमण करने व नाइट सफारी के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं। यहां आने वाले पर्यटकों का अनुभव अत्यधिक रोमांचक रहता है, क्योंकि वे यहां पर बाघ दर्शन के साथ-साथ रात के सन्नाटे में जंगल की निराली दुनिया का भी पूरा लुत्फ लेते हैं।
 
अकोला बफर में पर्यटन शुरू होने से आसपास स्थित ग्रामों के लोग भी प्रसन्न और उत्साहित हैं, क्योंकि गांव के पढ़े-लिखे बेरोजगार युवक गाइड बनकर कमाई करने लगे हैं। पन्ना-अमानगंज मुख्य मार्ग पर पन्ना से महज 15 किलोमीटर की दूरी पर अकोला बफर का प्रवेश द्वार है। यहीं से पर्यटक बफर में सफर का लुफ्त उठाने और वनराज का दीदार करने के लिए प्रवेश करते हैं। अकोला गेट के निकट ही टिकट काउंटर है जहां से पर्यटक टिकट लेकर बफर के सफर में जा सकते हैं। महज 12 सौ रुपए की टिकट पर 6 पर्यटक जिप्सी अथवा निजी वाहन से अकोला बफर के रोमांचकारी सफर में निकल कर लेंटाना की झाडियों के नीचे आराम फरमाते वनराज व नन्हे शावकों को  अठखेलियां करते हुए देख सकते हैं।
 
यहां आने वाले ज्यादातर पर्यटकों को बाघ के दर्शन का अवसर मिल जाने से पन्ना टाइगर रिजर्व क्षेत्र की तरह ही अब अकोला बफर में भी जिप्सी वाहनों की कतार लगने लगी है। बफर में सफर योजना की कामयाबी तथा पर्यटकों के बढ़ते रुझान को देख पार्क प्रबंधन अकोला बफर की ही तर्ज पर बफर क्षेत्र के अन्य दूसरे इलाकों को भी विकसित और संरक्षित करने की रणनीति बना रहा है, जिससे कोर क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहे बाघों के कुनबे को इन इलाकों में अनुकूल आश्रय मिल सके। अकोला बफर बाघिन पी-234 का घर है। वन परिक्षेत्राधिकारी लालबाबू तिवारी ने बताया कि पन्ना टाइगर रिजर्व के अकोला बफर का आकर्षण बाघिन पी-234 तथा उसका भरा-पूरा कुनबा है। मालूम हो कि पन्ना टाइगर रिजर्व की संस्थापक बाघिन टी-2 जिसे मार्च 2009 में कान्हा से पन्ना लाया गया था। इस बाघिन ने जुलाई 2013 में चार शावकों को जन्म दिया था। इन्हीं शावकों में से एक बाघिन पी-234 है। जिसके कुनबे ने अकोला बफर को गुलजार किया हुआ है।
 
इस बाघिन ने नर बाघ टी-7 के साथ मिलकर अपने कुनबे को बढ़ाया है। इसी बाघिन की बेटी पी-234 (23) ने अकोला बफर क्षेत्र में ही तीन शावकों को जन्म दिया है, जो 3 माह के हो चुके हैं और अपनी मां के साथ जंगल में विचरण कर शिकार करने के गुर सीखने लगे हैं। ये नन्हें शावक भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन चुके हैं। इन शावकों को अठखेलियां करते हुए देखने का सौभाग्य जिन पर्यटकों को मिल जाता है, वे खुशी से झूम उठते हैं। वनराज की एक झलक पाने के लिए लोग सैकड़ों किलोमीटर दूर से देश व प्रदेश में स्थित विभिन्न टाइगर रिजर्वों के भ्रमण हेतु आते हैं और इसके लिए हजारों रुपए भी खर्च करते हैं।
 
लेकिन पन्ना जिले के लोगों का यह सौभाग्य है कि उन्हें सड़क मार्ग पर ही चहल कदमी करते वनराज के दीदार हो जाते हैं। पन्ना-अमानगंज मार्ग पर अक्सर इस तरह के नजारे देखने को मिलते हैं। कई बार तो वनराज सड़क किनारे ही बैठ कर आराम फरमाते नजर आते हैं। फलस्वरूप इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन ठहर जाते हैं और लोग इस दुर्लभ नजारे को न सिर्फ देखते हैं बल्कि कैमरे में भी कैद करते हैं। बीते रोज नर बाघ पी-111 इसी तरह सड़क मार्ग से कुछ मीटर की दूरी पर काफी देर तक विश्राम करता रहा। जिससे सड़क मार्ग के दोनों तरफ वाहनों की कतार लग गयी। बड़ी देर तक यात्रियों ने इस दिलकश व रोमांचकारी दृश्य को देखा और वाहन में बैठे-बैठे इस बाघ की तस्वीर भी खींची।
 
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