05 Dec 2021, 06:34:17 के समाचार About us Android App Advertisement Contact us app facebook twitter android
news

समुदायों के बंटवारे का तूफान तुरंत नहीं थमा तो खत्म हो जाएगा भारत: फारूक अब्दुल्ला

By Dabangdunia News Service | Publish Date: Oct 13 2021 5:36PM | Updated Date: Oct 13 2021 5:36PM
  • facebook
  • twitter
  • googleplus
  • linkedin

नई दिल्‍ली। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने राज्य में नागरिकों की हत्या की हालिया घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि हर कोई असुरक्षित महसूस कर रहा है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के प्रशासन से सभी धर्मों के लोगों में सुरक्षा की भावना पैदा करने की अपील की। अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू कश्मीर में इस साल हुए आतंकी हमलों में 28 नागरिकों की मौत हुई है और मृतकों में सभी धर्मों के लोग शामिल हैं। वहीं, उनके पिता डॉ फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि अगर समुदायों के बंटवारे का तूफान तुरंत नहीं थमा तो ‘भारत’ भी नहीं रहेगा। नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष ने उम्मीद जताई कि हाल के दिनों में निशाना बनाए जाने की वजह से कश्मीरी पंडित और सिख समुदाय के लोग फिर से पलायन नहीं करेंगे। उन्होंने कहा, ‘हम सबको यह सुनिश्चित करने की पुख्ता कोशिश करनी चाहिए कि कश्मीर से अल्पसंख्यकों का पुन: पलायन न हो।’ उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी समुदाय दूसरे की तुलना में ज्यादा सुरक्षित महसूस नहीं करता। वहीं, नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष और उमर अब्दुल्ला के पिता डॉ फारूक अब्दुल्ला ने कहा, कश्मीर में अल्पसंख्यकों की हत्या करने वालों के मंसूबों को हराने के लिए मुसलमानों, सिखों, पंडितों, बौद्धों को एकजुट रहना होगा। फारूक ने बुधवार को कहा कि एक तूफान ने पूरे भारतीयता को अपनी चपेट में ले लिया है, जहां समुदायों को विभाजित किया जा रहा है और अगर यह तुरंत नहीं रुका, तो देश का अस्तित्व नहीं रहेगा। कौर की हत्या पर उन्होंने कहा कि मुसलमानों, सिखों और पंडितों को एकजुट होकर हत्यारों का एक साथ सामना करना होगा। 

 
उन्होंने कहा, ‘हमें दुश्मनों से एकजुट होकर लड़ना है और उनसे डरने की जरूरत नहीं है। उमर अब्दुल्ला ने एक इंटरव्यू में कहा, ‘इसे रोकने के लिए और इन समुदायों में सुरक्षा की भावना बहाल करने के लिए जो कुछ भी किया जा सकता है, वह किया जाना चाहिए। जाहिर है, इस काम में बड़ी जिम्मेदारी प्रशासन को निभानी है, लेकिन बहुसंख्यक समुदाय होने के नाते हम पर भी उस जिम्मेदारी का कुछ हिस्सा है। हमें वह जिम्मेदारी निभानी होगी।’ नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता ने जमीनी हकीकत पर ध्यान देने के बजाय ‘दुष्प्रचार और जनसंपर्क से जीत हासिल करने’ का प्रयास करने के लिए प्रशासन की आलोचना करते हुए अधिकारियों से कहा कि वे इस पर बात का अवलोकन करें कि आखिर हम जहां के तहां क्यों खड़े हैं। अब्दुल्ला ने हालिया हमलों को खुफिया एजेंसियों की नाकामी का परिणाम बताने से बचते हुए कहा, “मेरे ख्याल में यह खुफिया सूचना के आधार पर कार्रवाई करने में नाकामी का परिणाम है। इस विफलता के लिए आप सिर्फ पुलिस को दोष नहीं दे सकते हैं, क्योंकि आतंकवाद रोधी अभियान पुलिस, अर्द्धसैनिक बल और सेना चलाती है। यह हमारी आतंकवाद रोधी ग्रिड की सामूहिक नाकामी है।”उन्होंने दावा किया कि पिछले कुछ महीनों से इस तरह की बातें हो रही थी कि अल्पसंख्यकों, खासकर कश्मीरी पंडितों को निशाना बनाकर हमले किए जा सकते हैं। अब्दुल्ला ने कहा कि जब ऐसी बातें उन तक पहुंच सकती हैं जो सरकार का हिस्सा नहीं हैं तो ये खुफिया एजेंसियों को भी मालूम हुई ही होंगी और निश्चित रूप से उन्होंने संबंधित लोगों को यह रिपोर्ट दी होगी।
 
स्थानीय लोगों के विभिन्न आतंकी संगठनों में शामिल होने पर चिंता जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर सरकार और राजनीतिक पार्टियों को चिंतित होना चाहिए। अब्दुल्ला ने कहा कि युवाओं के आतंकी संगठन में शामिल होने की प्रवृत्ति किसी एक इलाके से नहीं हैं, ‘हम ये रिपोर्टें दक्षिण, मध्य और उत्तर कश्मीर से सुनते हैं। सरकार को कुछ जरूरी कदम उठाने की जरूरत है ताकि युवा बंदूक उठाने के विचार से प्रेरित न हों।’ अब्दुल्ला ने इस साल 24 जून को “दिल की दूरी और दिल्ली की दूरी” को हटाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान को याद करते हुए कहा कि अगर इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं तो आंतकी संगठनों में युवाओं के शामिल होने को काफी हद तक रोका जा सकता है। अब्दुल्ला ने घाटी में 400 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिए जाने के खिलाफ आगाह किया और कहा, “हमें बहुत सावधान रहने की जरूरत है कि हम बिना सोचे समझे प्रतिक्रिया न दें।” उन्होंने कश्मीर में पुलिस की हाल की कार्रवाई पर किए गये सवाल के जवाब में कहा कि सरकार को बहुत सावधान रहने की जरूरत है और उसे बदला लेने की प्रवृत्ति से कोई कदम उठाते नहीं दिखना चाहिए। अब्दुल्ला ने कहा कि अफगानिस्तान की स्थिति का कश्मीर में सुरक्षा स्थिति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, सिवाय इसके कि यह केंद्र शासित प्रदेश में सक्रिय आतंकवादी समूहों के लिए मनोबल बढ़ाने का काम कर सकता है।
  • facebook
  • twitter
  • googleplus
  • linkedin

More News »