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भारत शांति के रास्ते तभी चल सकेगा, जब ताकतवर होगा : भागवत

By Dabangdunia News Service | Publish Date: Jan 18 2020 4:02PM | Updated Date: Jan 18 2020 4:02PM
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मुरादाबाद। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि देश में हर जाति-धर्म का व्यक्ति हमारा अपना है और संघ सबको हिंदू समाज का अंग मानता है। उन्होंने कहा कि दुनिया में भारत को मजूबती के साथ खड़ा कराना संघ का यही लक्ष्य है। संघ के पश्चिम क्षेत्र के प्रचारकों व कार्यकर्ताओं से संवाद के लिए यहां चार दिवसीय प्रवास पर आए भागवत ने तीसरे दिन यहां एमआईटी सभागार में शुक्रवार को कहा कि भारत शांति के रास्ते पर तभी चल सकेगा, जब वह दुनिया में ताकतवर होगा।
 
इसलिए देश को समर्थवान बनाना होगा। उन्होंने कहा, "रूस महाशक्ति बना, अमेरिका लगभग महाशक्ति है और चीन इस ओर बढ़ रहा है। ये महाशक्तियां क्या करती हैं..क्या ये दूसरों की जमीन नहीं हड़पतीं?, ये मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं करती? मगर इन्हें कोई दोष नहीं देता है, क्योंकि ये महाशक्तियां हैं। 'समरथ को नहिं दोष गुसाईं' (समर्थवान के दोष को नहीं देखना चाहिए) दुनिया ऐसे ही चलती है।"
 
भागवत ने आगे कहा, "स्वामी विवेकानंद कहा करते थे कि दुर्बलता ही पाप है, इसलिए निर्भय हो और शक्ति संपन्न बनों, तभी लोग अच्छी बाते मानते हैं। हम तो भलाई करते ही रहे हैं। स्वतंत्र होने के बाद भी शांति के रास्ते पर चलते रहे, लेकिन उस रास्ते पर दुनिया हमें (भारत को) तब चलने देगी जब हमारे पास ताकत आएगी।
 
मोहन भागवत ने पश्चिम क्षेत्र के प्रचारकों और कार्यकर्ताओं को इस दौरान संघ के ²ष्टिकोण से हिंदू की व्यापक परिभाषा भी बताई। उन्होंने कहा, "भारत जिस कारण से भारत है, उसकी सुरक्षा करनी है। उसको छोड़कर उन्नति नहीं करनी है। संघ हिंदू समाज को संगठित करना चाहता है। जब संघ 'हिंदू समाज' कहता है तब संघ की हिंदू समाज की जो परिभाषा है। उसके अनुसार पंथ, भाषा, क्षेत्र, जाति, धर्म, प्रांत के आधार पर कोई भेद नहीं होता। कोई किसी भी प्रांत का हो, किसी भी जाति-धर्म को हो, वह हमारा अपना है। हमको एक संस्कृति मिली है।"
 
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