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शार्ली हेब्दो मैगजीन ने कशा तंज, भारत में 33 करोड़ देवी-देवता फिर भी नहीं कर पा रहे ...

By Dabangdunia News Service | Publish Date: May 14 2021 3:05PM | Updated Date: May 14 2021 3:05PM
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नई दिल्ली। मोहम्मद पैगंबर का कार्टून छापने वाली फ्रांस की व्यंगात्मक पत्रिका शार्ली हेब्दो एक बार फिर से सुर्खियों में है। फ्रांस की कार्टून मैगजीन शार्ली हेब्दो ने भारत में कोरोना के बढ़ते केसों और मौतों को लेकर तंज कसा है। मैगजीन ने यह तंज कसते हुए लिखा है कि भारत में करोड़ों देवी-देवता हैं, लेकिन कोई ऑक्सीजन की कमी पूरी नहीं कर पा रहा। दरअसल, इस बार पत्रिका ने भारत के कोरोना संकट और हिंदू देवी-देवताओं को लेकर तंज कसा है। हाल ही में फ्रांसीसी मैगजीन ने एक कार्टून जारी किया था जिसमें भारत में कोरोना महामारी और ऑक्सीजन की कमी पर तंज कसा। 28 अप्रैल को प्रकाशित हुए कार्टून में ऑक्सीजन के लिए तरसते भारतीयों को जमीन पर लेटे हुए दिखाया गया है। कार्टून में ऑक्सीजन सिलेंडरों के साथ ही बड़ी संख्या में लेटे हुए लोगों को दिखाया गया है। इसके साथ ही कैप्शन में मैगजीन ने लिखा है, 'भारत में 33 मिलियन देवी-देवता हैं, लेकिन कोई भी ऑक्सीजन का उत्पादन करने में सक्षम नहीं है।' दरअसल हिंदू धर्म में मान्यता है कि 33 करोड़ देवी-देवता हैं। 
 
हालांकि मैगजीन ने 33 करोड़ देवी देवताओं की जगह 33 मिलियन लिखा है, जिसका अर्थ 3.3 करोड़ हुआ। लेकिन साफ है कि कार्टून में हिंदू धर्म की मान्यताओं को आधार बनाते हुए भारत में कोरोना के बढ़ते केसों को संभालने में स्वास्थ्य सेवाओं की नाकामी पर तंज कसा है। मैगजीन की ओर से इस कार्टून को अपने फेसबुक अकाउंट पर भी साझा किया गया है। अब तक इसे सैकड़ों लोग शेयर कर चुके हैं। भारत के तमाम लोगों ने इस कार्टून की निंदा भी की है। कई लोगों ने इसे भारत की स्वास्थ्य सेवा पर तंज की बजाय हिंदू समाज का मजाक उड़ाने वाला कार्टून करार दिया है।
 
यही नहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिन्होंने इस कार्टून को अभिव्यक्ति की आजादी से जोड़ा है। बता दें कि फ्रांस की मैगजीन शार्ली हेब्दो अकसर धार्मिक मामलों पर कार्टूनों के जरिए तंज कसती रही है। यहां तक कि मैगजीन के दफ्तर पर पैगंबर मोहम्मद का कार्टून छापने को लेकर हमला भी हुआ था। इस अटैक में पत्रिका के कई शीर्ष कार्टूनिस्ट मारे गए थे। हालांकि अब भी पत्रिका ने अपने रुख में परिवर्तन नहीं किया है। उसका कहना है यह उसकी अभिव्यक्ति की आजादी है, जिसका वह इस्तेमाल जारी रखेंगे। कई यूजर्स ने शार्ली हेब्दो के इस कार्टून को एक सबक के तौर पर देखने की बात कही है।
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