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रेलवे को लेकर बंगाल के सपनों को पूरा करेंगे : PM मोदी

By Dabangdunia News Service | Publish Date: Feb 23 2021 12:24AM | Updated Date: Feb 23 2021 12:25AM
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज पश्चिम बंगाल में रेलवे के विकास की चार परियोजनाओं का उद्घाटन किया और कहा कि राज्य में रेलवे के क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से जो कमियां रह गई हैं, केन्द्र सरकार उन कमियों को दूर करेगी और बंगाल के सपनों को पूरा करेगी। मोदी ने राष्ट्रीय राजधानी से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इन परियोजनाओं को लोकार्पित किया। इस मौके पर पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़, रेलमंत्री पीयूष गोयल और केन्द्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो भी उपस्थित थे।

मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि पश्चिम बंगाल में कोलकाता, हुगली, हावड़ा और उत्तरी 24 परगना जिले में रेल और मेट्रो कनेक्टिविटी के विस्तार से हुगली सहित अनेक जिलों के लाखों लोगों का जीवन आसान होगा। जनजीवन को आसान बनाने के साथ साथ ये परियोजनाएं कोयला, इस्पात एवं उर्वरक उद्योगों के लिए भी प्रगति और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर लायीं हैं। उन्होंने कहा कि देश में परिवहन के माध्यम जितने बेहतर होंगे, आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास का संकल्प उतना ही सशक्त होगा।

मुझे खुशी है कि कोलकाता के अलावा हुगली, हावड़ा और उत्तरी 24 परगना जिले के साथियों को भी अब मेट्रो सेवा की सुविधा का लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि अब नाओपाड़ा से दक्षिणेश्वर तक की डेढ़ घंटे की दूरी सिर्फ 25-35 मिनट के बीच में सिमट जाएगी। दक्षिणेश्वर से कोलकाता के ‘कवि सुभाष’ या ‘न्यू गड़यिा’ तक मेट्रो से अब सिर्फ एक घंटे में पहुंचना संभव हो पाएगा, जबकि सड़क से ये दूरी ढाई घंटे तक की है। इस सुविधा से स्कूल-कॉलेज जाने वाले युवाओं को, दफ्तरों-फैक्ट्रियों में काम करने वाले कर्मचारियों को, श्रमिकों को बहुत लाभ होगा।

विशेष तौर पर इंडियन स्टेस्टिकल इंस्टीच्यूट, बारानगर कैम्पस, रवीन्द्र भारती विश्वविद्यालय और कलकत्ता विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग तक पहुंचने में अब आसानी होगी। यही नहीं, कालीघाट और दक्षिणेश्वर में मां काली के मंदिरों तक पहुंचना भी अब श्रद्धालुओं के लिए बहुत आसान हो गया है।’’ मोदी ने कहा कि कोलकाता मेट्रो को तो दशकों पहले ही देश की पहली मेट्रो बन गयी थी। लेकिन इस मेट्रो का आधुनिक अवतार और विस्तार बीते वर्षों में ही होना शुरू हुआ है। मेट्रो हो या रेलवे, आज भारत में जो भी निर्माण हो रहा है, उसमें मेड इन इंडिया की छाप स्पष्ट दिख रही है।

ट्रैक बिछाने से लेकर रेलगाड़यिों के आधुनिक इंजन और आधुनिक डिब्बों तक बड़ी मात्रा में उपयोग होने वाला सामान और प्रौद्योगिकी अब भारत की अपनी ही है। इससे हमारे काम की गति भी बढ़ी है, गुणवत्ता भी सुधरी है, लागत में भी कमी आई है और ट्रेनों की गति भी बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल, देश की आत्मनिर्भरता का एक अहम केंद्र रहा है और यहां से पूर्वोत्तर से लेकर, हमारे पड़ोसी देशों के साथ व्यापार-कारोबार की असीम संभावनाएं हैं। इसी को देखते हुए बीते सालों में यहां के रेल नेटवर्क को सशक्त करने का गंभीरता से प्रयास किया जा रहा है।

अब जैसे सिवोक-रैंगपो नई लाइन, सिक्किम राज्य को रेल नेटवर्क की सहायता से पहली बार पश्चिम बंगाल के साथ जोड़ने वाली है। कोलकाता से बंगलादेश के लिए गाड़यिां चल रही हैं। हाल ही में, हल्दीबाड़ी से भारत-बंगलादेश सीमा तक लाइन चालू की गई है। बीते 6 सालों के दौरान पश्चिम बंगाल में अनेकों ओवर-ब्रिज और अंडर-ब्रिज का काम शुरु किया गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज जिन 4 परियोजनाओं का लोकार्पण हुआ है, उससे यहां का रेल नेटवर्क और सशक्त होगा। इस तीसरी लाइन के शुरु होने से खड़गपुर-आदित्यपुर खंड में रेल की आवाजाही बहुत ही सुधरेगी और हावड़ा-मुंबई रूट पर ट्रेनों में होने वाली देरी कम होगी।

आजिमगंज से खागड़ाघाट रोड के बीच दोहरी लाइन की सुविधा मिलने से मुर्शिदाबाद जिले के व्यस्त रेल नेटवर्क को राहत मिलेगी। इस रूट से कोलकाता-न्यू जलपाईगुड़ी-गुवाहाटी के लिए वैकल्पिक मार्ग भी मिलेगा और पूर्वोत्तर तक कनेक्टिविटी बेहतर होगी। दानकुनी-बारुइपाड़ा के बीच चौथी लाइन का निर्माण भी बहुत अहम है। इसके तैयार होने से हुगली के व्यस्त नेटवर्क पर बोझ कम होगा। इसी तरह, रसूलपुर और मगरा खंड, कोलकाता का एक प्रकार से गेटवे है, लेकिन बहुत ज्यादा भीड़भाड़ वाला है।

नई लाइन शुरु होने से, इस समस्या में भी काफी हद तक राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि ये तमाम परियोजनाएं पश्चिम बंगाल को उन इलाकों से भी जोड़ रहे हैं, जहां कोयला, इस्पात और उर्वरक उद्योग हैं और अनाज पैदा होता है। इन नई रेल लाइनों से जनजीवन आसान होने के साथ उद्यम के लिए भी नए विकल्प मिलेंगे। यही आत्मनिर्भर भारत का भी अंतिम लक्ष्य है। पश्चिम बंगाल के रेलवे के क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से जो कमियां रह गई हैं, उन कमियों को पूरा करने के लिए हमने बीड़ा उठाया है, उसको हम अवश्­य पूरा करेंगे और बंगाल के सपनों को भी पूरा करेंगे।

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