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BJP को युवाओं के भविष्य की नही है चिंता: अखिलेश यादव

By Dabangdunia News Service | Publish Date: Jan 17 2020 8:43PM | Updated Date: Jan 17 2020 9:40PM
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लखनऊ। समाजवादी पार्टी(सपा)अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोप लगाया है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को देश के 65 प्रतिशत नौजवानों के भविष्य के प्रति थोड़ी भी चिंता नहीं है। यादव ने शुक्रवार को यहां जारी बयान में कहा कि आजादी के बाद देश में बेरोजगारी की दर सबसे ज्यादा आंकी गई है। सरकार की नोटबंदी और जीएसटी के लागू होने के बाद उद्योगधंधे बंद हो गए हैं और तमाम व्यापारिक प्रतिष्ठानों में कर्मचारियों की छंटनी होने लगी है।
 
भाजपा को देश के 65 प्रतिशत नौजवानों के भविष्य की चिंता नही है। नौजवानों का ध्यान शिक्षा संस्थानों में बढ़ती फीस और अव्यवस्था, बेरोजगारी, मंहगाई और दूसरे बुनियादी मुद्दों से भटकाने के लिए युवा महोत्सव के नाम पर खेल तमाशे आयोजित कर लेती है। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानन्द, जिनकी जयंती पर यह उत्सव मनाया जाता है। वे नौजवानों को धर्मान्धता, जातीयता और साम्प्रदायिकता की खिलाफत का संकल्प दिलाते थे।
 
अज्ञान और भूख को दूर करने के साथ ही इस बात पर बल देते थे कि अंधविश्वास मनुष्य का शत्रु है, पर धर्मान्धता उससे भी बढ़कर है। हमें संकीर्ण सीमा के बाहर जाना होगा अन्यथा हमें पतन की दशा में सड़कर मरना होगा। इसके सिवा दूसरा रास्ता नही। वे मानते थे देश की अवनति और पतन का मुख्य कारण जातिप्रथा है।
 
यादव ने कहा कि भाजपा नेतृत्व जातीयता, धर्मान्धता और साम्प्रदायिकता के ही सहारे अपनी राजनीति करती है। उसकी नीति नफरत और समाज को बांटने की है। अभी सीएए, के माध्यम से उसने साम्प्रदायिक ताकतों को उभरने का मौका दिया है जिसका देश भर में विरोध हो रहा है। उन्होंने कहा कि सपा की मांग है कि जाति की भी गणना हो। जाति के आंकड़े आ जाएंगे तो धर्म की लड़ाई खत्म हो जाएगी और विकास का रास्ता खुल सकेगा।
 
भारत के पिछड़ेपन के बीच जाति का ही रोड़ा है। सपा के प्रेरणापुरूष डॉ0 राममनोहर लोहिया और पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का भी यही मत था कि जातिप्रथा से गुलामी पैदा हुई। इसने समाज को बांटकर देश की प्रगति में अवरोध पैदा कर दिया है। सपा अध्यक्ष ने कहा कि  भाजपा ने नौजवानों से नौकरियां देने, कौशल प्रशिक्षण और शैक्षणिक सुधार का वादा किया था, ये वादे वादे ही बने रहे। विकास में उनकी भागीदारी का कोई प्रबंधन सामने नहीं आया है। नौजवान में जोखिम उठाने का साहस होता है। सरकार को नौजवानों के भविष्य को लेकर योजनाएं बनानी चाहिए जिससे उन्हें आगे बढ़ने का अवसर मिल सके। 
 
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