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टाटा समूह और अन्य के सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स को कैबिनेट से मंजूरी, देश में बनेंगी 300 करोड़ चिप

By Dabangdunia News Service | Publish Date: Feb 29 2024 6:08PM | Updated Date: Feb 29 2024 6:08PM
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भारत के खुद से सेमीकंडक्टर मैन्यूफैक्चरिंग का सपना अब साकार होने जा रहा है। गुरुवार को कैबिनेट मीटिंग में सरकार ने सेमीकंडक्टर मैन्यूफैक्चरिंग की 3 परियोजनाओं को मंजूरी दे दी। इसमें दो प्रोजेक्ट टाटा ग्रुप के हैं, जबकि एक प्रोजेक्ट जापान की कंपनी का है। केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट मीटिंग के बाद प्रेस से बातचीत में इस पूरे प्लान की जानकारी दी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में पीएम-सूर्य घर योजना और किसानों को खाद सब्सिडी के मुद्दे पर भी निर्णय लिया गया। पीएम-सूर्य घर योजना के तहत देश के 1 करोड़ घरों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली योजना के साथ-साथ कमाई का जरिया भी मिलेगा। इस योजना पर सरकार 75,021 करोड़ रुपए खर्च करेगी।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि देश में लगने जा रहीं तीन सेमीकंडक्टर यूनिट्स में कुल 1।26 लाख करोड़ रुपए के निवेश का अनुमान है। सरकार ने जिन प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है, उनमें सीजी पावर जापान की रेनेसस इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्प और थाईलैंड की स्टार्स माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स के साथ मिलकर गुजरात में एक सेमीकंडक्टर प्लांट लगाएगी।

वहीं टाटा सेमीकंडक्टर एसेंबली एंड टेस्ट प्राइवेट लिमिटेड असम के मोरीगांव में 27,000 करोड रुपए के निवेश से सेमीकंडक्टर संयंत्र लगाएगी। जबकि टाटा ग्रुप की ही टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स प्राइवेट गुजरात में ताइवान की पावरचिप सेमीकंडक्टर मैन्यूफैक्चरिंग कॉर्प के साथ मिलकर एक सेमीकंडक्टर प्लांट लगाएगी।

केंद्रीय मंत्रिमंडल से प्रस्तावों को मंजूरी मिलने के बाद दूरसंचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि तीनों प्लांट का निर्माण अगले 100 दिन में शुरू हो जाएगा। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड गुजरात के धोलेरा वाले प्लांट पर करीब 91,000 करोड़ रुपए का निवेश करेगी। इसी तरह टाटा सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट प्राइवेट लिमिटेड 27,000 करोड़ रुपए के निवेश से असम वाला संयंत्र लगाएगी। जबकि सीजी पावर का प्लांट गुजरात के साणंद में लगेगा। इस पर 7,600 करोड़ रुपये का निवेश होने का अनुमान है।

इन प्लांट में बनने वाले सेमीकंडक्टर्स की सप्लाई 8 सेक्टर्स को की जाएगी। इतना ही नहीं इन सभी प्लांट से सालाना 300 करोड़ से ज्यादा चिप देश में ही बनने लगेंगी। अभी भारत का जोर सेमीकंडक्टर्स को असेंबल करने पर रहेगा। वहीं अश्विनी वैष्णव का कहना है कि फैब्रिकेशन के मामले में भी भारत जल्द आत्मनिर्भर हो जाएगा।

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