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अपनी विदाई संबोधन में भावुक हुए आजाद

By Dabangdunia News Service | Publish Date: Feb 9 2021 5:25PM | Updated Date: Feb 9 2021 5:25PM
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नई दिल्ली। राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद मंगलवार को सदन में उस समय भावुक हो गये जब वह वर्ष 2005 में जम्मू कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में गुजरात के पर्यटकों की एक बस पर आतंकवादी हमले का जिक्र कर रहे थे। आजाद ने आतंकवादी की विभीषिका का उल्लेख करते हुए कहा कि वह जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री बने और राजधानी श्रीनगर पहुंचे तो आतंकवादियों ने अपनी मौजूदगी दर्शाने के लिए गुजरात के पर्यटकों से भरी एक बस पर हमला किया। इसमें कई लोग मारे गये।
 
उन्होंने बताया , ‘‘ हादसे का पता चलने पर वह घटना स्थल पहुंचें तो पुलिस वहां से लोगों को हटा चुकी थी। गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और मेरे अनुरोध पर केंद्र का विशेष विमान पर्यटकों को गुजरात ले जाने के लिए श्रीनगर हवाई अड्डे पहुंचा। मैं वहां उन बच्चों से मिला जिनमें किसी के पिता, तो किसी की माता, हमले में मारी गयी थी। ये बच्चें मुझसे लिपटकर रोने लगे और मेरी भी चीख निकल गयी।’’ इस घटना का जिक्र करते हुए आजाद सदन में भावुक हो गये और उनकी आंखों से आंसू निकल आयें। इससे पहले इसी घटना का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सदन में भावुक  हो गये ।
 
उनका गला रुंध गया और उन्होंने कई बार पानी पीया। वह अपनी बात पूरी नहीं कर पायें और उन्होंने अंगुली का इशारा करके अपनी बात सदस्यों को बताई। उन्होंने अपनी आंखों से आंसू भी पोछे। आजाद ने आतंकवाद खत्म करने की आश्वयकता बतायी और कहा कि आतंक से प्रभावित लोगों को मदद की जरुरत है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों के लिए हिन्दुस्तान जन्नत है। पड़ोसी देश  पाकिस्तान और अन्य मुस्लिम देशों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हिन्दुस्तान का मुसलमान बेहतर हालत में हैं क्योंकि उसकी सोच अलग है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम देशों में मुसलमान किसी हिन्दु या ईसाई से नहीं लड़ रहे  है बल्कि आपस में लड़ रहे हैं।
 
उन्होंने शेरो शायरी करते हुए  कहा कि देश से आतंकवाद खत्म होने से खुशहाली आयेगी। आतंकवाद से हजारों लोग  मरे हैं, औरतें बेवा हुई हैं और बच्चे अनाथ हो गये हैं। उन्होंने कश्मीरी  पंडितों का उल्लेख करते हुए कहा कि लोगों को फिर से बसाने का प्रयास करना  होगा। उन्होंने कहा, ‘‘ गुजर गया वो, जो छोटा सा फसाना था, फूल थे, चमन था  और आशियाना था, ना पूछ उजड़े चमन की दांस्तां, थे चार तिनके - लेकिन  आशियाना तो था। ’’ उन्होंने आतंकवाद से निपटने और लोगों के पुनर्वास का  प्रयास करने पर  बल देते हुए कहा, ‘‘दिल नाउम्मीद नहीं, नाकाम ही तो है, सुबह तो होगी कभी, लंबी ही सही, शाम ही तो है।’’ राज्यसभा से सेवानिवृत्त हो  रहे सदस्यों में आजाद के अलावा पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के मीर मोहम्मद फयाज और नजीर अहमद  लवाय तथा भारतीय जनता पार्टी के शमशेर  सिंह मन्हास शामिल है।
 
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