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चौथे दिन भी दिल्ली सीमा पर डटे किसानों का प्रदर्शन

By Dabangdunia News Service | Publish Date: Dec 1 2020 12:22AM | Updated Date: Dec 1 2020 12:27AM
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दिल्ली। तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में पंजाब, हरियाणा सहित देश के कई राज्यों से आये हजारों की संख्या किसानों का दिल्ली की सीमा पर चौथे दिन सोमवार को भी प्रदर्शन जारी रहा। पंजाब, हरियाणा, उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड से आए हजारों की संख्या में किसानों ने दिल्ली के टिकरी और सिंघू बॉडरों को पूरी तरह से अवरुद्ध हैं। तीन दिनों के अवकाश के बाद मंगलवार को कार्यालय और व्यावसायिक प्रतिष्ठान खुलने से यातायात की समस्या और अधिक बिगड़ने की आशंका है। किसान संगठनों आज प्रदर्शन के चौथे दिन फिर स्पष्ट किया कि उनकी मांगें, नए कृषि कानूनों को निरस्त करना, न्यूनतम समर्थन मूल्य का आश्वासन, बिजली अध्यादेश और पराली जलाने के जुर्माने पर बातचीत की हैं।
 
इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी-प्रयागराज राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के उद्घाटन समारोह में दावा किया कि विपक्षी दलों द्वारा किसानों को ‘गुमराह’ किया गया है। मोदी ने कहा,‘‘प्रचार प्रसार किया जाता है कि फैसला सही है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ है या कभी नहीं हुआ है।’’ उन्होंने फिर से कहा कि किसानों की भलाई के लिए इन कानूनों की बहुत आवश्यकता थी और अब किसानों के पास अपनी उपज बेचने के लिए अधिक विकल्प होंगे। सरकार ने आज दोहराया कि वह आंदोलनरत किसानों से बात करके उनके मुद्दों का समाधान करना चाहती है तथा बातचीत के लिए ना कोई शर्त लगायी गयी है और ना ही मन में कोई पूर्वाग्रह है।
 
केन्द्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने यहां एक कार्यक्रम के अवसर पर संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार किसानों की सभी समस्याओं को दूर करने एवं उनके कल्याण के लिए कृतसंकल्प है। गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने बार बार कहा है कि आंदोलनरत किसानों की समस्या को बिना किसी पूर्वाग्रह या शर्त के सुना जाएगा और खुले मन से विचार किया जाएगा।
 
सरकार किसानों की हर समस्या का समाधान करना चाहती है। उन्होंने कहा कि किसानों के बीच भ्रामक प्रचार किया गया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और मंडी की व्यवस्था समाप्त कर दी जाएगी। जबकि पंजाब में इस साल खाद्यान्न की खरीद लक्ष्य से कहीं अधिक हुई है जो एक रिकॉर्ड है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी संसद में बयान दे चुके हैं कि एमएसपी और मंडी की व्यवस्थाएं बरकरार रहेंगी।
 
कृषि मंत्री तोमर ने भी एक पत्र में लिख कर कहा है कि ये दोनों व्यवस्थाएं बनी रहेंगी। डॉ. पुरी ने कहा कि आंदोलनरत किसानों को सरकार की तरफ से बातचीत का आमंत्रण भेजा गया है। हमने कहा है कि किसान एक निर्धारित स्थान पर एकत्र हो जाएं जहां उनके लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करायीं गयीं हैं ताकि बाकी नागरिकों को दिक्कत नहीं हो। उन्होंने कहा कि भीड़ के साथ बात नहीं हो सकती है। किसान एक प्रतिनिधिमंडल के रूप में आयें और सरकार उनके साथ बिना शर्त बातचीत करेगी।
 
इस बीच कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने गृह मंत्री अमित शाह से बातचीत की। समझा जाता है कि किसान आंदोलन को लेकर ही दोनों नेताओं के बीच बातचीत हुई है। इसका ब्योरा नहीं मिल सका है।  इस बीच अखिल भरतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति ने कृषि सुधार कानूनों को वापस लिए जाने तक आंदोलन जारी रखने की सोमवार को घोषणा की।  समन्वय समिति के नेता योगेंद्र यादव और गुरनाम सिंह ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि किसी शर्त के साथ सरकार के साथ कोई बातचीत नहीं की जायगी। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन को लेकर देश भर में भ्रम फैलाया गया जिसका अब खुलासा हो गया है।
 
किसान नेताओं ने कहा कि पहले यह कहा गया कि कृषि सुधार कानूनों का बिचौलिए विरोध कर रहे हैं जबकि यह पूरी तरह से गलत साबित हो गया है। किसानों को बरगलाए जाने की बात कही गई जबकि बच्चे-बच्चे को कृषि सुधार कानूनों की जानकारी है।  उन्होंने कहा कि पहले यह कहा गया कि यह आंदोलन केवल पंजाब के किसानों का है जबकि इसमें पूरे देश के किसान शामिल हैं। यह देश का आंदोलन है और पंजाब इसका अगुआ है।
 
किसानों के नेतृत्व को लेकर भी भ्रम फैलाने का प्रयास किया गया जबकि इसमें नेतृत्वकारी लोग हैं।  यादव ने कहा कि कृषि सुधार कानूनों को वापस लिए जाने तक आंदोलन जारी रहेगा और यह अपना एतिहासिक महत्व साबित करेगा। किसान नेता गुरनाम सिंह ने कहा कि किसान जहां हैं वहीं डटे रहेंगे। उन्होंने कहा कि किसान अपने मन की बात कहने आए है। उनकी बात सुनी जानी चाहिए नहीं तो यह बहुत महंगा पड़ेगा। उन्होंने कहा कि किसान आरपार की लड़ाई लड़ रहे हैं।  गैर कांग्रेसी नौ विपक्षी दलों ने सोमवार को बैठक कर देशभर के किसानों के चल रहे आंदोलन का समर्थन किया और तीनों विवादास्पद कृषि कानूनों को तत्काल रद्द करने की सरकार से मांग की। 
 
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