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आरक्षण को संविधान सम्मत समर्थन, 35 ए, 370 हटे : मोहन भागवत

By Dabangdunia News Service | Publish Date: Sep 20 2018 1:43PM | Updated Date: Sep 20 2018 4:21PM
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नई दिल्ली। राम मंदिर पर अध्यादेश का मामला सरकार के पास है और आयोजन का मामला रामजन्म भूमि मुक्ति संघर्ष समिति के पास है और दोनों में मैं नहीं हूं। आंदोलन में क्या करना है वह उच्चाधिकार समिति को तय करना है। अगर वह सलाह मांगेगी तो मैं बताऊंगा। मैं संघ के नाते चाहता हूं कि राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर जल्द बनना चाहिए। भगवान राम अपने देश के बहुसंख्य लोगों के लिए भगवान हैं उनको लोग इमाम-ए-हिंद मानते हैं। इसलिए जहां राम जन्मभूमि है वहां मंदिर बनना चाहिए।
 
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रोग्राम का आज आखिरी दिन है। बुधवार को मोहन भागवत ने लोगों के सवालों का उत्तर दिया। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अंतरजातीय विवाह करने वालों में सबसे ज्यादा आरएसएस के लोग हैं। लोगों को एक स्लिप दी गई थी जिस पर लिखा था कि आप सवाल पूछ सकते हैं और अपना सवाल लिखकर देने का निर्देश दिया गया था।
 
अंतरजातीय विवाह को समर्थन
दूसरे सवाल में अतंरजातीय विवाह के बारे में पूछा गया। इसके बारे में भागवत ने कहा कि अंतरजातीय विवाह का समर्थन करते हैं। मानव-मानव में भेद नहीं करना चाहिए। भारत में संघ के स्वयंसेवकों ने सबसे ज्यादा अंतरजातीय विवाह किया है। समाज को अभेद दृष्टि से देखना जरूरी है। इससे हिंदू समाज नहीं बंटेगा। इसलिए हम सभी हिंदुओं को संगठित करने का प्रयास कर रहे हैं। जाति व्यवस्था के बारे में पूछे गए एक एक सवाल के जवाब में भागवत ने इसे कुव्यवस्था बताया और उसे दूर करने पर जोर दिया। 
 
शिक्षा में शामिल हो रामायण, महाभारत
क्या रामायण, महाभारत को देश की शिक्षा में शामिल करना चाहिए? इसके जवाब में भागवत ने कहा, अपनी परंपरा के मुताबिक नई शिक्षा नीति बनानी चाहिए। नई शिक्षा नीति आने वाली है, उम्मीद है उसमें हमारी परंपरा समाहित होगी। ग्रंथों का अध्ययन शिक्षा में अनिवार्य है, ऐसा संघ का मत है। एक सवाल पूछा गया कि नीति नियामक संस्थाओं में अंग्रेजी का प्रभुत्व है और हिंदी देश की भाषा कब बनेगी।
 
आरक्षण के साथ खड़ा संघ
सामाजिक विषमता को दूर करने के लिए संविधान में जहां जितना आरक्षण दिया गया है, संघ का उसका समर्थन रहेगा। आरक्षण कब तक चलेगा इसका निर्णय वही करेंगे जिनके लिए आरक्षण तय किया गया है। सामाजिक विषमता हटाकर सबके लिए बराबरी हो इसलिए संविधान में प्रावधान किया गया है। इसलिए संविधान प्रदत्त सभी आरक्षणों को संघ का पूरा समर्थन है और रहेगा। आरक्षण समस्या नहीं, आरक्षण की राजनीति समस्या है।
 
एससी/एसटी कानून पर राय
एससी/एसटी कानून के बारे में भागवत ने कहा कि अत्याचार दूर करने के लिए एक कानून बना, यह अच्छी बात है लेकिन इसका दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। उसका दुरुपयोग होता है इसलिए संघ मानता है कि उस कानून को ठीक से लागू करना चाहिए।
 

 

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