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जाधव की फांसी पर फिर से विचार करें पाकिस्तान

By Dabangdunia News Service | Publish Date: Jul 21 2019 2:05AM | Updated Date: Jul 21 2019 2:47AM
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नई दिल्ली। अदालत ने पाकिस्तान की ज्यादातर आपत्तियों को बहुमत से खारिज कर दिया है। हालांकि जजों ने भारत की कुलभूषण जाधव को दोषी ठहराने वाले फैसले को रद्द करने, उन्हें रिहा करने और उन्हें स्वदेश भेजने की मांग को ठुकरा दिया है। अदालत ने ये भी माना है कि कुलभूषण जाधव को इतने दिनों तक कानूनी सहायता नहीं देकर पाकिस्तान ने वियना संधि का उल्लंघन किया है। फैसले के आने के बाद कुलभूषण जाधव के पैतृक गांव यानी महाराष्ट्र के सतारा जिले के अनावाड़ी में भी जश्न देखने को मिला है। वहीं भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भरोसा जताया है कि कुलभूषण जाधव को न्याय मिलेगा।
 
इस फैसले के बाद भारत का पक्ष रखने वाले वकील हरीश साल्वे ने कहा कि अदालत से भारत को राहत मिली है। उन्होंने कहा कि अदालत ने यह सुनिश्चित किया है कि पाकिस्तान वियाना कंवेंशन को ठीक ढंग से लागू करे। सुनवाई के दौरान पाकिस्तान ने कुलभूषण जाधव की नागरिकता पर सवाल उठाए लेकिन अंतरराष्ट्रीय अदालत ने पाकिस्तान को लताड़ लगाई। हरीश साल्वे ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय अदालत ने पाकिस्तान को कहा कि कॉन्सुलर एक्सेस देने के अलावा कानूनी प्रतिनिधि मिलने के बाद कुलभूषण जाधव के साथ पाकिस्तान के संविधान के मुताबिक निष्पक्ष सुनवाई हो, यह सुनिश्चित होना चाहिए। इसका मतलब यह है कि पाकिस्तानी सेना की अदालत में यह सुनवाई नहीं हो सकती।
 
अदालत में भारत की दलील- भारत, पाकिस्तान के इस दावे को खारिज करता रहा है कि जाधव को 3 मार्च 2016 को बलूचिस्तान प्रांत से गिरफ्तार किया गया था। भारत का दावा है कि जाधव को ईरान से अगवा किया गया, जहां उनका निजी व्यापार था। भारत ने आईसीजे में यह दलील दी थी कि जाधव को 'कॉन्सुलर एक्सेस' यानी भारतीय दूतावास के अधिकारियों से बात करने का हक न देकर पाकिस्तान ने विएना संधि का उल्लंघन किया है। 
 
इससे पहले भी भारतीय नागरिकों को भी जासूसी के आरोप में फंसा चुका है पाकिस्तान
सरबजीत सिंह- पंजाब के तरणतारण जिले के सरबजीत पर 1990 में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में बम धमाकों में शामिल होने का आरोप लगाते हुए उन्हें मौत की सजा सुनाई। 
 
किशोर भगवान- फरवरी 2014 को भारतीय मछुआरे किशोर भगवान की पाकिस्तानी जेल में मौत की खबर आई। उनपर बिना किसी दस्तावेज पाकिस्तान के आर्थिक क्षेत्र में घुसने का आरोप लगाया गया।
 
किरपाल सिंह- पंजाब के गुरदासपुर से संबंध रखने वाले किरपाल सिंह 1992 में गलती से पाकिस्तान की सीमा में दाखिल हुए। 25 वर्षों तक वह जेल में रहे। लाहौर हाईकोर्ट ने इस मामले में उन्हें बरी कर दिया इसके बावजूद पाकिस्तान ने उन्हें आजाद नहीं किया। अज्ञात कारणों से लाहौर जेल में उनकी मौत हो गई।
 
चमेल सिंह- जम्मू जिले के चमेल सिंह को पाकिस्तानी सेना ने 2008 में गिरफ्तार किया। उनपर जासूसी करने का आरोप लगा। उनके परिवार के मुताबिक खेतों में काम करने के दौरान उन्होंने गलती से सीमा पार कर ली थी। 2013 में लाहौर की जेल में पुलिसवालों की पिटाई से उनकी जान चली गई।
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